Friday, 30 December 2016

जाने फिंगर प्रिंट के बारे मे

आज के दौर में फिंगर प्रिंट एक जरूरी प्रकिया के रूप में अपनाई जाती है। कहीं भी कोई संदिग्‍ध मामला होता है तो सबसे पहले जांच फिंगर प्रिंट से ही शुरू होती है। इसकी मदद से मामले काफी हदतक समय पर और सही दिशा में सुलझ जाते हैं। जेल में मौजूद कैदियों के भी फिंगर प्रिंट आज लिए जाते हैं। ऐसे में आइए जानें कब से और कैसे शुरू हुई ये फिंगर प्रिंट लेने की शुरुआत…
एक नया कैदी आया
1903 में अमेरिका में एक बड़ा ही अजीबो गरीब मामला सामने आया। यहां पर एक मामले में कान्सास स्‍िथत एक संघीय जेल जेल में विल विलियम वेस्‍ट नाम का कैदी बंद था। कैदी विलियम वेस्‍ट की नियमानुसार शारीरिक माप पहचान आदि सब वहां पर बकायदा रजिस्‍टर्ड थी। इसके अलावा उसकी फोटो आदि भी वहां पर जमा थी। इसके आलवा वहां और भी कैदी थे। हमेशा की तरह एक दिन यहां पर एक नया कैदी विल वेस्‍ट आया। इस पर जब उसका नाम आदि नोट किया गया तो कुछ पलों के लिए लोग शॉक्‍ड हो गए। यहां पर इसी शक्‍ल और मिलते जुलते नाम का आदमी और मौजूद था।
पहचान काफी मुश्‍किल
 सबसे बड़ी बात तो पहले से मौजूद कैदी विलियम वेस्‍ट और नए आए कैदी विल वेस्‍ट में काफी सारी सिमिलेरिटी थी। नाम की समानता से लेकर उनकी शक्‍लें भी मिलती जुलती थीं। जेल अधिकारियों के भी होश उड़ गए। इनकी असली पहचान करना काफी मुश्किल हो रहा था। इसके बाद अब इन दोनों में पहचान करने के लिए फिंगरप्रिंट टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल किया गया। यह टेक्‍नोलॉजी इसकी असली पहचान करने में सफल हुई। इसके बाद से फिंगरप्रिंट लेने का चलन शुरू हो गया। धीरे धीरे हर जगह पर कैदियों के फिंगर प्रिंट लेने का नियम बन गया।



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